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http://localhost:8080/xmlui/handle/123456789/859Full metadata record
| DC Field | Value | Language |
|---|---|---|
| dc.contributor.author | गुलाबराव महाराज | - |
| dc.date.accessioned | 2023-07-26T08:26:41Z | - |
| dc.date.available | 2023-07-26T08:26:41Z | - |
| dc.date.issued | 1933 | - |
| dc.identifier.uri | http://localhost:8080/xmlui/handle/123456789/859 | - |
| dc.description.abstract | श्री. गुलाबराव मह्मराजकृत्न ग्रंथांचां मुद्र्णार्चे काम हृप्ता घेऊन त्याबैनव्ळी “ मुरतख् ” नांवाचां ग्रंथ प्रथम आम्हा छापून वेदान्तप्रेमो जनांना सळाद्ण् करीत आहे। या संपूर्ण ग्रंथांचे दान माग हृप्तीकॄ. ल्यापक्रा हा पाहेला भाग आहे. या ग्रंथाचे पूर्ण नांव संप्रदाय सुऱतरु हृ' असून त्यांत मळाघूयैसंप्रट्त्सांर्वे ध्येय व द्यावे साधन याचा ।व’रोप उहापोह कला आहे. माध्यूयै सांप्रदाय हा कांहीं नवीन नसून भागवत साप्रदायात देवाचे"। ठव्’रुं ,।ण। अळाहैबळाप, पुत्र, पति अस एक नाते वळागबून जी भक्ति केली जाते व्यपिंक्रा पति नातें ठेवून केल्या जाणाऱ्या मक्तींचा व तिच्या साघनमागळीचा महाराजांच्या ग्रंथांतून विशेष विचार केला असहृयामुळें, त्या मक्तींच्या यिचारप्रायान्यास घरून श्नळीमद्दाराजानीं ज्रन्या भागवत संप्रदायासच माघूग्रॅ संप्रदाय असे नामांतर ।दहेंऽ आहे… म्हणून मानू‘पँसंप्नदाय हैं एक नवीनच बंड आंहृ असं कोणी समतूंनये. | en_US |
| dc.publisher | शंकर जयराम सोमवंशी, सोलापूर | en_US |
| dc.subject | श्री गुलाबराव महाराज कृत सॅमप्र ग्रंथावळीं | en_US |
| dc.title | संप्रदाय सुरत | en_US |
| dc.type | Book | en_US |
| Appears in Collections: | Dattu Waman Poddar | |
Files in This Item:
| File | Description | Size | Format | |
|---|---|---|---|---|
| PNVM-5-2730-Sampraday Surtaru Bhag 1 La.OCR.pdf | 219.77 MB | Adobe PDF | View/Open |
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