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http://localhost:8080/xmlui/handle/123456789/1846Full metadata record
| DC Field | Value | Language |
|---|---|---|
| dc.contributor.author | दो वामन पोतदार | - |
| dc.date.accessioned | 2026-03-12T06:49:16Z | - |
| dc.date.available | 2026-03-12T06:49:16Z | - |
| dc.date.issued | 1922 | - |
| dc.identifier.uri | http://localhost:8080/xmlui/handle/123456789/1846 | - |
| dc.description | पुस्तकाचे स्वरूप मनौहारि करम्यासठीं या महागाईंव्या काळांतहिं कागद उ’चळी वापरला आहे. एक चित्र व चार नकान्नैहि दिकै आहेत. ळिनतें आणखाँहि अतानोंत अर्ते आमच्याप्नमर्णि ग्रेपकामीसद्दि वाटत कस" र्लेच पाहिजे. विशेषत: इंग्रज व मराठें या दोपांचाहि विशेष सँबेघ ध्यानांत येईल अर्थी स्मारक व उद्रोघक चित्रे द्यार्वीत. उ. बाजीराव, आहेंपष्टन, नाना, दौक्त्रतरात, “ माठिट’ , बैक्वि. “द्दिष्टींण” , “ … ” , “ पेरू ” इ. ऐतिहासिक व्यक्ति; आसईं, क्डगांक्, वोरपाय्, पुणे-चेगम खडकी, कोंरँगांक्, इ. युद्धभूमौ. | en_US |
| dc.description.abstract | पि० आश्विन पुंषि 3, १८४० रें[नीं ‘मरठि व इंगन' या ग्न‘ग्चिं विरॅत्रूत परीक्षण ळिदूनप णे साहें. माते मित्र झ्त्तिहाप्तसंशा- घक कैंप् पांझेना फ्य्नॅनैन यांनीं आपल्या ‘रळाष्टहितैषी‘ या पत्रांत त्याचा काही भाग प्रसिद्ध केला. सर्वे परीक्षण पुस्तकरूपर्नि का- ढार्वे असा मूळ संकेत होताच, रत्म्यटूळिड्रुवेपींर्तींळुञ्छ खांक वाचून पुष्कळ वाघफांनॉप्’हे तसाच हेतु आग्रहाने द्शां’वेला. | en_US |
| dc.publisher | जगिद्धतेच्छु प्रेस, पुणे | en_US |
| dc.subject | मराठे व इंग्रज. | en_US |
| dc.title | मराठे व इंग्रज | en_US |
| Appears in Collections: | Dattu Waman Poddar | |
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| File | Description | Size | Format | |
|---|---|---|---|---|
| PNVM-5-1012-Marathe V Engraj (Pustak Parikshan).OCR.pdf | 12.48 MB | Adobe PDF | View/Open |
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