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http://localhost:8080/xmlui/handle/123456789/1799| Title: | सेनापतत बापट वाङ् .मय समग्र ग्रंथ |
| Other Titles: | धुंतिराज तवष्णु देव, पुणे |
| Authors: | धुंतिराज तवष्णु देव |
| Keywords: | १९३९ सेनापतत बापट वाङ् .मय |
| Issue Date: | 1939 |
| Publisher: | धुंतिराज तवष्णु देव, पुणे |
| Abstract: | नप्चकजनांस- कारागारीं खडतर अशा, तोंडण्या मानृ-पह्मा । वर्षे सोळा सतत क्तुनळी निर्मिली सांब्रू आशा [। आट्द्देळो जो रविंमुम उदा ज’व्वन-ल्फूर्लि-फारीं । वाणी वैशी क्ररा’णे प्रक्रटे संत हा प्रांतिद्द्यरों |
| Description: | मद्द्यराष्ट्रांत तुहंगन्नाद्यामळाप्त लोकमान्यांपातून सुखात साली. ‘गौता- रहृह्य’ या जगप्रसिद्ध ग्रंथानंतर थळोर्डे भोर्डे गप्रपद्य तुवंगयाद्याप मराठी मापेंत येत गेलें आहे. त्यांत उक्केखनीय म्ऱ् एणजे दे, म साने गुचजप् यांची ‘पत्री’ हा पद्य ग्रंथ होय. हा बहुतक्र निरनिराळ्या तुरुंगांत रचला गेला आहे; व तो ईंश्वरविषयक सकरुण त्र देशमक्तिपर कलैंव्यकमैयैरक अशा सरस कवनांनीं भरहैध्छा आहे. तो वाढीव असतां सेनापर्तींच्या फाव्यप्' सारखाच भास होतो. |
| URI: | http://localhost:8080/xmlui/handle/123456789/1799 |
| Appears in Collections: | Dattu Waman Poddar |
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|---|---|---|---|---|
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